राजनीति# समाज # स्त्री #हत्या #शून्य #न्यूज चैनल
अपराधी कोई भी हो उनको सजा मिलनी चाहिए हमारी संवेदना है,
लेकिन जिनके पेट में ज्यादा पानी हिल रहा है और लाश पर राजनीति करने पर तुले हुए हैं जो योगी आदित्यनाथ और वर्गविशेष (क्षत्रिय ) को पानी पी पी कर कोस रहे हैं, ऐसी पप्पू सेना,समाजवादी,जातिवादी और इस देश में लाश पर राजनीति करने वाले, बलात्कार पर राजनीति करने वाले घटिया सोच वाले लोग जो लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर देश को बांटने का प्रयास करने वाले जातिगत राजनीति करने वाले ऐसे घटिया तुच्छ मानसिकता वाले लोग उनके एक घटिया प्रयास जातिगत वैमनस्य बाटने की राजनीति को योगी जी ने विफल कर दिया । प्रदेश में दंगा फैलाने की कोशिश को असफल किया ।उत्तर प्रदेश के हाथरस पर राजनीति करने वाले लोग जिनको राजस्थान कश्मीर कैराना आंध्र प्रदेश हैदराबाद में हुए केस नजर नहीं आएंगे।
अब हम ऐसे देश में रहते हैं जहां पर सवर्ण और दलित की राजनीति, बलात्कार की राजनीति, लाशों पर राजनीति होती है ,यहां भावनाओं की कोई कदर नहीं है ,जहां रिश्तो की कोई कदर नहीं है बाप मर रहा होता है बेटा कहता है मैं नहीं आऊंगा मुझे कोरोना हो जाएगा, देख लेना बाप के हाथ में अंगूठी है कुर्ते की जेब में आईफोन है दोनों बहुत महंगे हैं निकाल लेना बाप मर जाएगा बाकी चीजें बहुत महंगी है। यहां पर पड़ोसी से झगड़ा होता है दूसरा पड़ोसी भाईचारा भूल कर के उसकी रिपोर्ट लिखाने चला जाता है रिपोर्ट में लिख आता है मेरी बीवी के साथ गलत कर रहा था खुद ही कपड़े फाड़ देंगे जाकर रिपोर्ट लिखा देंगे ऐसे ऐसी जगह पर हम संवेदना को क्या स्थान दें बिल्कुल समझ में आता है कैमरे के इस पार की घटना जो हमें दिखाई जा रही है वह बिल्कुल भी नहीं उस क्षेत्र में हुई घटना है कि खीझकर झूठ को चिल्लाने से वह सच नहीं होगा हत्या हुई है किसी की मृत्यु हुई है बिल्कुल संभव है और उसके अपराधियों को सजा भी मिलनी चाहिए किंतु सारे पहलुओं को नजर रखकर।
पिछले एक हफ्ते में ना जाने हाथरस जैसी कितनी घटनाएं देश परदेश में हुई होंगे किंतु अफसोस इसी बात का है की ऐसी घटनाओं का राजनीतिक फायदा और उसको भी व्यापारिक फायदा बनाकर समाज के सामने प्रस्तुत करने का घृणित तरीका कुछ लोगों ने निकाल लिया है , और उनका फायदा उस प्रदेश में है वहां वह हो-हल्ला करेंगे वहां वह इंसाफ की आवाज उठाएंगे वहां वह मुआवजे की बात करेंगे वहां सौदेबाजी नौकरी की बात करेंगे वहां दलित की बात करेंगे वहां सामाजिकता की बात करेंगे और सामाजिक समरसता की बात करेंगे किंतु जहां उनका फायदा नहीं है वहां कितनी भी जघन्य घटनाएं होती रहे जिसमें उनका फायदा नहीं है वह कभी भी आवाज नहीं उठाएंगे क्षेत्र का दौरा नहीं करेंगे उस क्षेत्र में कभी भी आंदोलन नहीं होगा और उनके लोग ना ही सोशल मीडिया पर ना ही पब्लिकली ना ही कहीं पर चौराहे पर चर्चा करेंगे।
अंत में यही कहना चाहूंगा, कब तक इस देश के लोग भावना शून्य विचारशून्य संवेदनहीन होकर अपने फायदे के लिए कन्या भ्रूण हत्या अपने फायदे के लिए, कन्या पूजा अपने फायदे के लिए , विवाह अपने फायदे के लिए पुनर्विवाह फिर तलाक करने वाले अपने फायदे के लिए लाश पर राजनीति, बलात्कार पर राजनीति करते रहेंगे और बेटी स्त्री महिला के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करेंगे तब तक मुझे तो न्याय की उम्मीद समाज में नहीं है बेटी की लाश को मुआवजे और TRP के लिए बाजार बनाने वाले ऐसे मां ,बाप, भाई , मीडिया, सत्ता दल , प्रशासन, से भी सच कहने और न्याय दिलाने की उम्मीद नहीं है ।